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बंबईया: हुलाहूप में घूमती मुंबई की कहानी — शिल्पा गणात्रा के निर्देशन में बच्चों ने रचा वर्ल्ड रिकॉर्ड

जब बात हो मुंबई की तो आपके मन में, आँखों के सामने सबसे पहली तस्वीर क्या होगी?

मेट्रो सिटी, समंदर, ऊँची-ऊँची ईमारतें, दौड़ती-भागती गाडियाँ, मुंबई की लाइफलाइन; लोकल ट्रेन, वड़ा-पाव, बॉलीवुड, इतिहास, उत्सव, लोगों का जुनून या कुछ और?

Hulla Hoop 2025
Image Source: NAC Media

जो भी मुंबई के विषय में थोड़ा बहुत जानता होगा, थोड़ी बहुत जानकारी रखता होगा या यूँ कहिए कि मुंबई को जीता होगा, उसकी आँखों के आगे ऐसी ही अनगिनत तस्वीरें दौड़ती होंगी। वैसे तो आधी सदी से और आधी से ज़्यादा फ़िल्में मुंबई में बनी हैं, मुंबई से ही बनती हैं, पर कैसा हो अगर मुंबई के ऊपर कोई फ़िल्म हो और इन सारी तस्वीरों को अपने एक अनोखे, अलग अंदाज़ में पेश करें? कहानी तो हर कोई कहता है, अगर कोई कहानी नाचकर बताए तो? और नाचने से मतलब बस संगीत पर थिरकना भर नहीं। कोई कहानी को, मुंबई की ज़िंदगानी को, इस भाग-दौड़ और हर दिन की घुमक्कड़ यात्रा को अपनी कमर पर गोल-गोल नचाते हुए दर्शाए तो? अब ज़्यादा पहेलियाँ ना बनाते हुए सीधे मुद्दे पर आते हैं कि, मुंबई की नृत्य (डांस) गुरु, निर्देशक, जानी मानी समाज सेविका और कितनी ही भूमिकाएँ वास्तविक जीवन में निभाने वाली और अतिशयोक्ति नहीं होगी यदि हम ऐसा लिखे कि एक दिन विश्व कीर्तिमान (वर्ल्ड रिकॉर्ड) बनाने का भी कीर्तिमान बनाने वाली सुश्री शिल्पा गणात्रा जी ने इस बार अपनी लगन और मेहनत से एक और अद्भुत कारनामा किया है। उन्होंने बनाई है एक फ़िल्म “बंबईया” जो कि मुंबई को पूरी तरह से परिभाषित करती है, दर्शाती है और वो भी छोटे-छोटे बच्चों द्वारा हुलाहूप करते हुए।

जी हाँ पिछले माह लगभग चालीस छोटे-छोटे बच्चों ने मुंबई के अलग-अलग भूभाग पर हुलाहूप करते हुए और हुलाहूप करते करते दूसरी गतिविधियाँ करते हुए एक अनोखा कीर्तिमान यानि कि वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है और उन सभी बच्चों का, उस पूरी टीम का सम्मान समारोह सम्पन्न हुआ 29 जून 2025, रविवार सुबह, कांदिवली के पोइसर जिमख़ाना में, जहाँ मुंबई की जानी-मानी हस्तियाँ, मीडिया, अतिथिगण और भाजपा से पूर्व सांसद और लोकप्रिय नेता श्री गोपाल शेट्टी स्वयं उपस्थित थे और शिल्पा जी के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि वे संस्कृति, संगीत और इतिहास की धरोहर को आगे बढ़ा रही हैं, देश के भविष्य को उचित मार्गदर्शन दे रही हैं और इतना ही नहीं, श्री गोपाल जी ने सभी चालीस बच्चों को स्वयं सम्मानित किया और प्रशस्तिपत्र प्रदान किया।

Author

  • Karan Nimbark

    लेखक करन निम्बार्क की जन्मभूमि व कर्मभूमि मुंबई है । वर्ष २००४ में मुंबई विश्वविद्यालय से वाणिज्य में प्रथम श्रेणी में स्नातक किया हैं । करन को हिन्दी के साथ अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, मारवाड़ी भाषाओं का भी ज्ञान हैं । इन्हें लेखन में बचपन से ही रूचि रही है । अब तक कुछ समाचार पत्रों, ऑनलाइन समाचार साईट ( अजेय भारत, द फेस ऑफ़ इंडिया ) के लिए कई कविताएँ, लेख, समीक्षा लिख चुके हैं । कुछ विज्ञापन फिल्में व कुछ लघु फिल्में भी बनाई हैं । मंच से भी जुड़े हैं । सामाजिक कार्यों में भी समयानुसार यथाशक्ति भाग लेते रहते हैं । पहला हिन्दी उपन्यास “नायिका” सह लेखक के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित श्री अतनु बिस्वास के साथ लिखा था और उनका दूसरा उपन्यास जो कि नारी प्रधान है और जिसे भारत के दिग्गज लेखकों और कवियों ने सराहा है, शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है । वर्तमान में भारत के अग्रणी डिजिटल मीडिया संस्थान में मुख्य हिन्दी अनुवादक के रूप में कार्यरत हैं और अब तक कई अँग्रेजी व हिन्दी फिल्मों, वेब सीरीज़, म्यूजिक विडियो के लिए सबटाइटल, एफएन, क्लोज्ड कैप्शन लिख चुके हैं ।

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