बंबईया: हुलाहूप में घूमती मुंबई की कहानी — शिल्पा गणात्रा के निर्देशन में बच्चों ने रचा वर्ल्ड रिकॉर्ड
जब बात हो मुंबई की तो आपके मन में, आँखों के सामने सबसे पहली तस्वीर क्या होगी?
मेट्रो सिटी, समंदर, ऊँची-ऊँची ईमारतें, दौड़ती-भागती गाडियाँ, मुंबई की लाइफलाइन; लोकल ट्रेन, वड़ा-पाव, बॉलीवुड, इतिहास, उत्सव, लोगों का जुनून या कुछ और?
जो भी मुंबई के विषय में थोड़ा बहुत जानता होगा, थोड़ी बहुत जानकारी रखता होगा या यूँ कहिए कि मुंबई को जीता होगा, उसकी आँखों के आगे ऐसी ही अनगिनत तस्वीरें दौड़ती होंगी। वैसे तो आधी सदी से और आधी से ज़्यादा फ़िल्में मुंबई में बनी हैं, मुंबई से ही बनती हैं, पर कैसा हो अगर मुंबई के ऊपर कोई फ़िल्म हो और इन सारी तस्वीरों को अपने एक अनोखे, अलग अंदाज़ में पेश करें? कहानी तो हर कोई कहता है, अगर कोई कहानी नाचकर बताए तो? और नाचने से मतलब बस संगीत पर थिरकना भर नहीं। कोई कहानी को, मुंबई की ज़िंदगानी को, इस भाग-दौड़ और हर दिन की घुमक्कड़ यात्रा को अपनी कमर पर गोल-गोल नचाते हुए दर्शाए तो? अब ज़्यादा पहेलियाँ ना बनाते हुए सीधे मुद्दे पर आते हैं कि, मुंबई की नृत्य (डांस) गुरु, निर्देशक, जानी मानी समाज सेविका और कितनी ही भूमिकाएँ वास्तविक जीवन में निभाने वाली और अतिशयोक्ति नहीं होगी यदि हम ऐसा लिखे कि एक दिन विश्व कीर्तिमान (वर्ल्ड रिकॉर्ड) बनाने का भी कीर्तिमान बनाने वाली सुश्री शिल्पा गणात्रा जी ने इस बार अपनी लगन और मेहनत से एक और अद्भुत कारनामा किया है। उन्होंने बनाई है एक फ़िल्म “बंबईया” जो कि मुंबई को पूरी तरह से परिभाषित करती है, दर्शाती है और वो भी छोटे-छोटे बच्चों द्वारा हुलाहूप करते हुए।
जी हाँ पिछले माह लगभग चालीस छोटे-छोटे बच्चों ने मुंबई के अलग-अलग भूभाग पर हुलाहूप करते हुए और हुलाहूप करते करते दूसरी गतिविधियाँ करते हुए एक अनोखा कीर्तिमान यानि कि वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है और उन सभी बच्चों का, उस पूरी टीम का सम्मान समारोह सम्पन्न हुआ 29 जून 2025, रविवार सुबह, कांदिवली के पोइसर जिमख़ाना में, जहाँ मुंबई की जानी-मानी हस्तियाँ, मीडिया, अतिथिगण और भाजपा से पूर्व सांसद और लोकप्रिय नेता श्री गोपाल शेट्टी स्वयं उपस्थित थे और शिल्पा जी के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि वे संस्कृति, संगीत और इतिहास की धरोहर को आगे बढ़ा रही हैं, देश के भविष्य को उचित मार्गदर्शन दे रही हैं और इतना ही नहीं, श्री गोपाल जी ने सभी चालीस बच्चों को स्वयं सम्मानित किया और प्रशस्तिपत्र प्रदान किया।