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Let’s Talk About Mental Illness

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Let's Talk About mental illness

Depression by the year 2030 will be the second-highest disease burden of all the diseases in the world. Closer to us, back home in India, the numbers are expected to increase manifold. Yet, mental illnesses are still treated as a stigma. We do not recognise the gravitas of the situation.

When someone is feeling down, most people react to the person cynically. They are either deemed uninspired or lazy. While, for some, it maybe a brief period of a trough, for most, it is an endless and hopeless cycle that feels more and more, bleak than the day before.

What is frustrating is that people don’t realise the gravitas of the situation at hand. More and more people are diagnosed with clinical depression, yet the conversation around it becomes lesser and lesser. There have been instances where the person’s plight wasn’t even known to the closest friends and families until it was too late. It is tragic to know about reality through the most devastating way possible — suicide letters. If only, they had been understood and got the necessary help.

Mentalillness

Source: Seed Psychology

It is too easy to point fingers and state that those suffering could share their plight. However, we need to ask ourselves– is there a place for them to open up? What is the intention with which they will be received? We need to create an environment that is conducive in nature. Not one to victimise and certainly not to judge.

Depression has many causes. Some are medical, due to family history, others due to the circumstances and surroundings. As we are regularly exposed to the virtual world, we are susceptible to ridicule and abuse under the pretence of having the right to express opinions. It is a vicious cycle of being exposed to more and more condemnation when we seek validation externally. Most people just need a shoulder to cry on. They don’t need to be victimised or pitied. All they look for is someone who can listen to them while they process what they are going through.

Mental ailments are not a stigma. They are not an occurrence due to curses or any superstitions. It is essential to look at people facing mental break down as a period of contemplation and introspection. Those going through it should be supported with consideration and thoughtfulness. Be open to having conversations and discussions on what goes through their minds. Give them space to express themselves. Although it may seem far-fetched and daunting, assure them that by observing what they are going through and being aware of all the changes happening within. Assure them that they can get over the phase with resilience.

Mental Illness

Source: DBSA Monrovia

It is imperative to reach out to them and let them know that although all seems to be bleak right now, there is only one direction to move when you hit rock bottom. So the next time you see someone and sense that they are mentally down, #Dobarapoocho.

Hindi

हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य की मौत

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General Bipin Rawat

तमिलनाडु के कन्नूर में वायुसेना के हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत 11 अन्य लोगों का निधन हो गया है। सीडीएस बिपिन रावत सेना के Mi-17V5 हेलिकॉप्टर कोयंबटूर के सुलूर एयरबेस से वेलिंगटन की ओर जा रहे थे, जहां कॉलेज के एक कार्यक्रम में उन्हें हिस्सा लेना था। हेलिकॉप्टर सुलूर से वेलिंगटन की ओर जाते समय कुन्नूर में क्रैश हुआ। सीडीएस बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर नीलगिरी के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, इस इलाके को टी एस्टेट भी कहा जाता है। वायुसेना के हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जनरल रावत को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। वायुसेना ने ट्वीट करते हुऐ इस बात की पुष्टि की है। वायुसेना की जानकारी के अनुसार 14 में से 13 लोगों की मौत हो चुकी है और ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का अस्पताल में इलाज चल रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि दुर्घटना कोहरे की स्थिति के चलते साफ न दिखाई देने के कारण हुई है। वायुसेना ने कहा कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

जिस हेलिकॉप्टर में जनरल रावत सवार थे वह हेलीकॉप्टर एमआई सीरीज का था। Mi-17V5 हेलिकॉप्टर में दो इंजन होते हैं और इसे वीआईपी चॉपर कहा जाता है। काफी लंबे समय से वायुसेना इसका इस्तेमाल करती आई है। यदि कहीं हवाई पट्टी की सुविधा उपलब्ध नहीं होती तो वहां पर वीआईपी मूवमेंट इसी हेलीकॉप्टर के जरिए होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समेत कई नेताओं और अभिनेताओं ने जनरल रावत के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विट करते हुए कहा “तमिलनाडु में हेलिकॉप्टर दुर्घटना से मैं बहुत दुखी हूं, जिसमें हमने जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और सशस्त्र बलों के अन्य कर्मियों को खो दिया है। उन्होंने अत्यंत परिश्रम के साथ भारत की सेवा की। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।

जहां जनरल रावत के निधन पर पूरा देश शोक व्यक्त कर रहा हैं वहीं सेवानिवृत्त सेना अधिकारी कर्नल बलजीत बख्शी ने संवेदनहीनता भरा ट्वीट किया जिसमे उन्होंने कहा, “कर्म का लोगों से निपटने का अपना तरीका है।” हालांकि लोगों की कड़ी निंदा के बाद उन्होंने अपने अकाउंट से ट्वीट को डिलीट कर दिया।

इतिहास:

चीफ डिफेंस ऑफ़ स्टाफ विपिन रावत का जन्म उत्तराखंड के पौरी गढ़वाल जिले में हुआ था। लम्बे समय तक फ़ौज में रहने के दौरान जनरल रावत को सेना के प्रमुख सम्मानों से सम्मानित किया गया था। 16 दिसंबर 1978, में जनरल रावत पहली बार मिजोरम के 11वीं गोरखा रायफल की 5वीं बटालियन में कमीशन पर शामिल हुए थे।

जनरल रावत के पिता भी इस यूनिट का हिस्सा थे। उन्होंने अपने पिता से युद्धनीति सीखी, जिनका आगे जंग में उन्होंने भरपूर इस्तेमाल किया। भारत-चीन युद्ध के दौरान जनरल रावत ने मोर्चा संभाला था। इस दौरान उन्होंने नार्थ ईस्ट फ्रॉन्टियर एजेंसी बटालियन की कमान संभाली थी। इसके अलावा उन्होंने कांगो में संयुक्त राष्ट्र की पीसकीपिंग फोर्स की भी अगुवाई की। चीन से जंग के दौरान भी जनरल रावत ने बहादुरी का परिचय दिया था। वर्ष 1962 में मैकमोहन रेखा पर गतिरोध को लेकर जनरल रावत ने पहली बार चीन से लोहा लिया और बहादुरी से उन्हें रोके रखा। जम्मू-कश्मीर में शांति कायम करने के लिए उन्होंने एक कंपनी की कमान संभाली और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के अलावा पूर्वी सेक्टर पर पांचवीं बटालियन 11 गोरखा राइफल्स की कमान भी उन्होंने संभाली थी। 1 सितंबर, 2016 को जनरल रावत ने सेना के उप-प्रमुख का पद संभाला और 31 दिसंबर 2016 को सेना चीफ का पद पर अधिकृत थे। उनकी कार्य कुशलता और अनुभव को देखते हुए भारत सरकार ने 1 जनवरी 2020 में जनरल रावत को तीनों सेना का प्रमुख यानी चीफ डिफेन्स ऑफ़ स्टाफ बनाया।

सेना में रहते हुए उन्हें अब तक परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक, सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया।

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Corona

ओमिक्रॉन वैरिएंट के चलते भारत में स्थगित हुई अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा

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Omicron | News Aur Chai | International Flight Ban

कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण भारत में पूर्व निर्धारित अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाएं रोक दी गई हैं। सरकार की तरफ से पहले यह फैसला किया गया था कि 15 दिसंबर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को शुरू किया जाएगा। लेकिन ओमिक्रोन के खतरे को मद्दे नज़र रखते हुए अब इस फैसले को टाल दिया गया है। यानी अब भारत में 15 दिसंबर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं हो पाएंगी। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन की तरफ से कहा गया है कि वो अपने पूर्व के फैसले पर पुनर्विचार करेगें।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 नवंबर को ओमिक्रॉन को लेकर बैठक की थी और इसी दौरान 15 दिसंबर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा गया था। प्रधानमंत्री ने विदेश से आने वाले लोगों की सख्त निगरानी करने की बात भी कही थी। ओमिक्रॉन के चलते हाल ही में सिक्किम ने विदेशी यात्रियों के आने-जाने पर रोक लगा दी है।

पिछले वर्ष कोरोना के चलते एहतियातन देश में नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई थी। हालांकि कुछ समय बाद कई देशों के साथ सीमित हवाई सेवा शुरू कर दी गई थी। ऐसा माना जा रहा था की इस बार क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के मौके पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिर से शुरू कर दी जाएंगी लेकीन, दक्षिण अफ्रीका में पाए गए ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण अभी इस पर ब्रेक लगता दिख रहा है।

कई देशों में इस खतरनाक वैरिएंट को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं, और इससे बचने के लिए अनेकों ऐ‍हतियात बरते जा रहे है। WHO ने इसे ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’, यानि चिंताजनक घोषित किया है।

जनरल वीके सिंह ने सोमवार को कहा था कि “अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को फिर से शुरू करने के लिए हम पर जनता का जबरदस्त दबाव है”। हम सभी नियमों का पालन कर रहे हैं और सावधानी बरत रहे हैं। बाहर से आने वाले हर व्यक्ति का परीक्षण और जांच हवाई अड्डे पर किया जा रहा है। परिणामों को देखने के बाद ही, उन्हें अनुमति दी जा रही है।

कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों के तहत अब यात्रियों को 14 दिन की यात्रा जानकारी और कोरोना वायरस की निगेटिव आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट एयर सुविधा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार खतरे की श्रेणी में आने वाले देशों के यात्रियों को भारत पहुंचने पर कोरोना जांच करवानी होगी और जांच का परिणाम आने तक एयरपोर्ट पर ही इंतजार करना होगा। अगर उनकी जांच निगेटिव आती है तो उन्हें सात दिन तक होम क्वारंटीन में रहना होगा और आठवें दिन फिर जांच की जाएगी। इस बार भी निगेटिव आने पर उन्हें अगले सात दिन के लिए खुद अपने स्वास्थ्य पर नजर रखने को कहा जाएगा।

कोरोना वायरस का नया वैरियंट ओमीक्रोन भारत में भी दस्तक दे चुका है। साथ ही साथ ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बोत्सवाना, ब्राजील, कनाडा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, घाना, हांगकांग, आयरलैंड, इजराइल, इटली, जापान, मोजाम्बिक, नीदरलैंड, नाइजीरिया, नॉर्वे, पुर्तगाल, रीयूनियन द्वीपसमूह, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, स्विटजरलैंड, यूएई, ब्रिटेन और अमेरिका भी ओमीक्रोन के गिरफ्त में आ चुके हैं।

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जम्मू-कश्मीर में गैर-कश्मीरी नागरिकों पर आतंकियों का बढता अत्याचार!

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Kashmir | News Aur Chai
जम्मू-कश्मीर में बीते कुछ दिनों से गैर-कश्मीरी नागरीकों पर आतंकी हमलों के मामले सामने आ रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में बीते कुछ दिनों से गैर-कश्मीरी नागरीकों पर आतंकी हमलों के मामले सामने आ रहे हैं। खासतौर से गैर-कश्मीरी मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा अब तक नौ नागरीकों की हत्या कर दी गई है। 5 अक्टूबर को श्रीनगर में आतंकियो ने वीरेंद्र पासवान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वीरेंद्र पासवान बिहार का रहनेवाला था और पिछले दो वर्षों से श्रीनगर में गोलगप्पे बेचता था। आतंकियों ने 6 अक्टूबर को फार्मेसी मालिक एम.एल बिंदू, स्ट्रीट वेंडर और एक टैक्सी ड्राइवर की हत्या कर दी थी। श्रीनगर के ईदगाह इलाके में आतंकियों ने स्कूल की मुख्य अध्यापिका सुपिंदर कौर और अध्यापक दीपक शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी।

16 अक्टूबर को अरविंद कुमार साह पर आतंकियों द्वारा गोली चलाई गई, उन्हें गंभीर स्थिति में श्रीनगर के SMHS अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अरविंद कुमार बिहार के बांका जिले में रहनेवाले थे और श्रीनगर में गोलगप्पे बेचते थे। 16 अक्टूबर की ही शाम को आतंकियों ने पुलवामा में सगीर अहमद नाम के व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी। सगीर अहमद उत्तरप्रदेश का रहनेवाला था एवं पेशे से वह एक कार्पेंटर था। 17 अक्टूबर, रविवार को आतंकियों ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में के तीन मजदूरों को गोली मार दी, जिससे दो मजदूरों की मृत्यु हो गई और एक मजदूर बुरी तरह से घायल हो गया।

कश्मीर के अलग अलग हिस्सों में अनेकों प्रवासी बसे हुए हैं। अधिकतर लोग रोजगार की तलाश में बिहार से कश्मीर आए हुए हैं। लोगों का कहना है कि वे अगले महीने तक अपने घर बिहार जाना चाहते थे मगर दहशतगर्दों के कारण उन्हें काम छोड़कर बीच में ही जाना पढ़ रहा है। लोग डरे हुए हैं कि यदि स्थिति जल्द से जल्द सामान्य नहीं हुई तो उनका रोजगार और बच्चों की पढ़ाई छुट जाएगी।

27 वर्षों से कश्मीर में रह रहे 45 वर्षीय पंकज पासवान का कहना है कि उन्होंने इतने वर्षों में कश्मीर की इससे भी बदतर हालत देखी है। उनका कहना है कि एक के बाद एक हो रही हत्याओं से कश्मीर में दहशत का माहौल बना हुआ है और वे भी इस समय बिहार लौट जाना चाहते हैं। आतंकियों द्वारा निशाना बनाए गए नागरिकों का कहना है कि अनुच्छेद-370 के हटने से और कश्मीर के विकास से आतंकी बौखलाए हुए हैं। इसी वजह से वो लोगों पर हमला कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि रविवार को हुए आतंकी हमले से पहले उन्हें उम्मीद थी कि हालात सुधर जाएंगे मगर लगातार हो रही हत्याओं से उन्हें भी जान का खतरा बना हुआ है।

पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती का कहना है कि, यह घटना निंदनीय है। भोले भाले लोगों को बेवजह मरना और उनका रोज़गार छीनना बेहद दुःख की बात है।

बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि यह शत प्रतिशत नरसंहार है, गैर-कश्मीरियों की यह भीषण हत्या बिल्कुल अमानवीय है और यह आतंकियों की बौखलाहट को दर्शाता है।

सीपीआई के नेता मोहम्मद युसूफ तारिगामी का कहना है कि भोले भाले मजदूरों की हत्या एक जघन्य अपराध है, सिर्फ निंदा करना काफी नहीं है, ऐसे समय में सभी को एकजुट होकर इस तरह के अपराध के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और आतंकियों को कड़ी सजा देनी चाहिए।

जम्मू कश्मीर की लेफ्टनेंट गवर्न मनोज सिन्हा ने कहा है की निर्दोषों के खून का बदला इन आतंकियों से लिया जायेगा, कश्मीर की शांति को भंग करने कि कोशिश की जा रही है, लोगों को आगे बढ़ने से रोका जा रहा है, कश्मीर के विकास को रोकने की साजिश हो रही है मगर हम ऐसा नहीं होने देंगे। मनोज सिन्हा ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘आवाम की आवाज’ में कहा “आतंकी हमले में मारे गए के लिए मैं शोक व्यक्त करता हूं, हम सभी लोग आपके साथ हैं और आतंकियों से हार एक हत्या का पूरा बदला लिया जायेगा यह मेरा वादा है”।

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